सोमवार, 25 सितंबर 2017

दरिद्रता ।

       

              दरिद्रता।

मनुष्य प्रत्येक दशा में   अपने ही विचारो का पारिणाम है । हम
और आप या सभी अपने विचारों के अनुरूप ही परिणाम पाते है । जैसे विचार वैसे ही मनुष्य आैर उसकी स्थिति । दारिद्रता के विचार होते है तो मनुष्य दारिद्र रहता है। धनी होने के विचार होते हैं, तो मुनष्य धनी होता है।  
         किसी विचारक की उपरोक्त बातें उन लोगो के लिए
प्ररेणादायक है जाे अपनी गरीबी का रोना रोते रहते है ।
जो अपनी गरीबी या निर्धनता दरिद्रता को लेकर दुखी रहते हैं और जीवन में निराश होकर बैठ जाते हैं।
       आप चाहे कितने ही निर्धन क्यों न हो,यदि आपका मन इसे स्वीकार नहीं ,तो आपकी निर्धनता अधिक समय तक नहीं रहने वाली। निर्धनता कोठ, मकान,मोटर आदि से नहीं होती,निर्धनता तो विचारों से होती है। जो मन से गरीब और दारिद्र है वह कभी ,अपनी निर्धनता से मुक्त नहीं हो सकता।
           इसलिए गरीबी ,निर्धनता आद के विचार निकालकर आशावान बनि और सफलता पाने के लिए प्रयास कीजिए । जो लोग करोड़पति बनें हैं उनमें आत्मविश्वास था । उनके मन में धनवान बनने के लिए सपने के साथ - साथ वैसी ही आशाएं थीं,लगन थी , आत्मविश्वास था। कोई भी निराश और मन से कमजोर व्यक्ति धनवान नहीं बन सकता । अपने मन में दीनता ,दुर्बलता ,दुख और व्याधि की कल्पना मत कीजिए ,इससे आपका कोई भी संबंध नहीं है। इन विचारों से मन की उत्पादक शक्ति गिरेगी। इसलिए अपनी उत्पादन शक्ति को बढ़ाइए , अपने विश्वास को दृढ़ कीजिए, आशा का दामन न छोड़िए । यही तो सफलता का मूलमंत्र है। इसी से आपका जीवन सुख और आनंद से भर जाएगा।

                धन्यवाद।।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

किताबें

गुरू