संक्लप
मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जिसको स्वतंत्र इच्छा अथवा संकल्प शक्ति का वरदान प्राप्त है ।
संक्लप शक्ति मुनष्य के मनोबल को बढ़ाने में सहायक है ।
अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए ना तो अपनी सीमाओ की परवाह करनी चाहिए,ना कठिन रास्तो से डरना चाहिए ।बस
एक दृढ़ संकल्प शक्ति पालिए ओई बढ़ते चलो अपनी मंजिल की और ।
अगर अपने प्राथमिक प्रयासो मे असफल भी होते है तो भी
हाथ पर हाथ धरकर बैठो नहीं,चलते रहो अपने लक्ष्य की ओर
हमारी संकल्प शक्ति ही हमारी उपलिबधियों का आघार है।
हम लोक व्यवहार में प्रचलित इस लोकोक्ति को अपना प्रेरणा स्त्रोत बना सकते हैं।
"जहाँ चाह है, वहाँ राह है।"
धन्यवाद।🙏🙏🙏🙏
हाथ पर हाथ धरकर बैठो नहीं,चलते रहो अपने लक्ष्य की ओर
हमारी संकल्प शक्ति ही हमारी उपलिबधियों का आघार है।
हम लोक व्यवहार में प्रचलित इस लोकोक्ति को अपना प्रेरणा स्त्रोत बना सकते हैं।
"जहाँ चाह है, वहाँ राह है।"
धन्यवाद।🙏🙏🙏🙏
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