शुक्रवार, 8 सितंबर 2017

             
   व्यक्तित्व 

 
    
किसी भी व्यक्ति का चारित्रिक विकास व व्यक्तित्व का निर्माण  उसके सुंदर वस्त्रों तथा  उसके वैभव से नहीं होता है। उसके चरित्र और व्यक्तित्व तो उसके कर्मो का फल हैं। यदि आपके कर्म अच्छे है तो आप अच्छे बनेगें ,और आपके साथ रहने वाला भी अच्छा बन जायेगा । यदि आपके कर्म बुरे है तो निः संदेह उनका प्रभाव भी बुरा ही होगा । हर व्यक्ति का जीवन उसके द्वारा निश्चित आर्दशो के अनुरूप ही बनता है। हम अपने जीवन को जिस किसी भी सोच में ढालेंगे , आपके चेहरे पर आपके विचारो की झलक स्पष्ट झलकेगी । क्योकि जब हमारे विचार बदलते है तो हमारे शारिरक हावभाव भी बदल जाते है।
अब यह हम पर ही निर्भर है कि अपने जीवन को किस दिशा में ले जाए।


इसलिए आप विचार कीजिए कि आपके कर्म कैसे होने चाहिए ,अच्छे या बरे, क्योंकि वह अंततः आपके साथ -साथ आपके सम्पर्क में आने वाले को भी प्रभावित करेगा।


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