शनिवार, 30 सितंबर 2017

                        सही दिशा

         

एक व्यक्ति  था जो बहुत देवताओं को पूजता और बहुत गुरू बनाकर , किसी  न किसी से कुछ पाने की फरीक में रहता ।

वह एक गुरु  के पास बैठा था। इतने में एक अन्य भक्त आया और बताया कि उसने अपने खेत  में चार - दस हाथ गहरे गङ्ढे खोदे। किसी में भी पानी नहीं निकला।"पांचवा गङ्दा खोदने जा रहा हूँ। बताइये पानी निकलेगा या नहीं।"

पहले से ही बैठा चतुर व्यक्ति गुरू के उत्तर देने तक न ठहर सका। आवेश में बोला - "इतने गड्ढे खोदने के स्थान पर यदि एक ही स्थान पर पचास हाथ गड्ढ़ा  खोदते तो इतनी जमीन भी खराब न होती और पानी भी मिल जाता।"

बात समझदारी की थी तो उसने मान ली। नया कुआँ खोदने के स्थान पिछले गड्डे को ही गहरा करने की बात समझ में आई और सिखावन को क्रियान्वित करने के लिए वापस लौट गया।अब गुरू ने उस चतुर व्यक्ति से कहा -  " तुम भी बहुत देवता और गुरूओं को तलाश न करके यदि एक पर ही श्रद्धा जमा लेते तो अच्छा होता। "

दर - दर भटकने से अच्छा है एक दर पर दृढ़ आस्था रखना।

धन्यवाद।।🙏🙏

शुक्रवार, 29 सितंबर 2017

।। युवाशक्ति।।

          
 
किसी भी महापुरूष की जीवनी में , उन्होंने क्या किया, इसी का कथानक रहता है । कोई व्यक्ति सिर्फ अपना और अपने
परिवार का का ही निर्वाह करता रहे तो उसे परिवारवाले भी
स्मरण नहीं रखते । महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक का नाम आज भी सब जानते हैं, प र क्या हम अपने ही उन पूर्वजो के
बारे में जानते हैं, जो सिर्फ सौ साल पहले ही हुए थे? दरअसल
याद उसी को किया जाता है, जाे औरों के लिए जीता है ।

आज समाज एवं देश की निगाहें सिर्फ युवाशक्ति की और ही
केनिद्रत है । आज युवाशक्ति जिस वातावरण में रह रही है,वे
सब बातें जीवन के प्रतिकूल है। दूरदर्शन एवं सभी समाचार
माध्यमों में धम्रपान ,मदिरापान,वासना,हिंसा,बलात्कार आदि
दृश्यो की भरमार है । लगता है जीने की कला का आधार ही
बदल रहा है
जीवन एक एक क्षण से बना है । समय को सुकार्य में लगाना
चाहिए इसका युवाशक्ति को हमेशा ध्यान रखना चाहिए।
सेवा ही परम धर्म है युवा पीढ़ी को चाहिए कि वह अपने भीतर मौजूद शक्तियों और योग्यताओं को  पहचाने और उनका सदुपयोग कहीं ।

  धन्यवाद ।

गुरुवार, 28 सितंबर 2017

प्रतिभा ।

         प्रतिभा ।।

महान दार्शनिक सुकरात ने कहा है कि"जीवन का आनंद 

स्वयं को जानने में हैं।" स्वयं का निरीक्षण करना , अपनी प्रतिभा को पहचानना और उसका निरतंर विकास करना।
वास्तव मे यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए । आप अब तक सफल हुए लोगो में से किसी की भी जीवनी उठा कर पढ़ लीजिए ,उनमे एक बात समान है और वह यह कि उन्होंने अपनी प्रीतभा को पहचाना और केवल उसी पर ध्यान दिया ।

प्रकृति ने हम सभी को अलग-अलग बनाया है। सभी एक दूसरे से भिन्न है और सभी के अन्दर एक विशेष गुणहोता है
। हममें से ज्यादातर लोग अपनी योग्यतओं और प्रतिभाओं 
का विकास करने की बजाय उन्हें दबा देंते है । 

दोस्तो, जिन्दगी सिर्फ एक बार ही मिलती है। अगर आप चाहते हैं तो फिर जाे आपका पैशन है उसे अपना प्राफेशन
बनाइए । शुरुआती दौर मे कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है,पर अंततः आपका जीवन खुशियों से भर जाएगा ।


    धन्य

मंगलवार, 26 सितंबर 2017

।। सुख - दुःख ।

    सुख- दुःख ।।

मनुष्य जीवन मे सुख - दुःख , धूप- छाँव के समान है ।
जब मनुष्य के जीवन मे दुःख नहीं आता तब तक वह सुख की महत्ता को नहीं समझ पाता । मनुष्य जीवन के सभी दिन एक
समान नहीं रहते । जैसे सूर्य की किरने पृथ्वी पर समान रूप से  नहीं पड़ती उसी प्रकार सुख-दुःख की छांव जीवन पर समान
रूप से नहीं पड़ती है।

सुख और दुःख मनुष्य के अपने कर्मो का ही फल होता है
इसके लिए हमे दूसरो को दोष नहीं देना चाहिए ।
आजकल का मनुष्य अपने दुःखो से उतना दुःखी नहीं है,
जितना दूसरो के सुखो से ।

हमारा मनुष्य जीवन अनमोल है । यह जीवन तभी सार्थक
बनेगा जब इसका उपयोग अच्छे कार्यो के लिए करें ।
ज्ञानी लोग  इस मूल्यवान अवसर का लाभ उठाते है और मूर्ख
गँवाकर अन्त में रोते पछताते है ।

सोमवार, 25 सितंबर 2017

दरिद्रता ।

       

              दरिद्रता।

मनुष्य प्रत्येक दशा में   अपने ही विचारो का पारिणाम है । हम
और आप या सभी अपने विचारों के अनुरूप ही परिणाम पाते है । जैसे विचार वैसे ही मनुष्य आैर उसकी स्थिति । दारिद्रता के विचार होते है तो मनुष्य दारिद्र रहता है। धनी होने के विचार होते हैं, तो मुनष्य धनी होता है।  
         किसी विचारक की उपरोक्त बातें उन लोगो के लिए
प्ररेणादायक है जाे अपनी गरीबी का रोना रोते रहते है ।
जो अपनी गरीबी या निर्धनता दरिद्रता को लेकर दुखी रहते हैं और जीवन में निराश होकर बैठ जाते हैं।
       आप चाहे कितने ही निर्धन क्यों न हो,यदि आपका मन इसे स्वीकार नहीं ,तो आपकी निर्धनता अधिक समय तक नहीं रहने वाली। निर्धनता कोठ, मकान,मोटर आदि से नहीं होती,निर्धनता तो विचारों से होती है। जो मन से गरीब और दारिद्र है वह कभी ,अपनी निर्धनता से मुक्त नहीं हो सकता।
           इसलिए गरीबी ,निर्धनता आद के विचार निकालकर आशावान बनि और सफलता पाने के लिए प्रयास कीजिए । जो लोग करोड़पति बनें हैं उनमें आत्मविश्वास था । उनके मन में धनवान बनने के लिए सपने के साथ - साथ वैसी ही आशाएं थीं,लगन थी , आत्मविश्वास था। कोई भी निराश और मन से कमजोर व्यक्ति धनवान नहीं बन सकता । अपने मन में दीनता ,दुर्बलता ,दुख और व्याधि की कल्पना मत कीजिए ,इससे आपका कोई भी संबंध नहीं है। इन विचारों से मन की उत्पादक शक्ति गिरेगी। इसलिए अपनी उत्पादन शक्ति को बढ़ाइए , अपने विश्वास को दृढ़ कीजिए, आशा का दामन न छोड़िए । यही तो सफलता का मूलमंत्र है। इसी से आपका जीवन सुख और आनंद से भर जाएगा।

                धन्यवाद।।

शनिवार, 23 सितंबर 2017

तनाव ।

      तनाव ।

अक्सर हम किसी काम को शुरू करने से
पहले ही उसकी सफलता और असफलता को लेकर तनावग्रस्त हो जाते है।
यह तनाव जब अधिक समय तक बना रहता है,तो चिन्ता रुपी कीड़ा बन जाता है। कुछ लोग तनाव से मुक्त होने के लिए नशीले पदार्थों का सेवन प्रारम्भ कर देते है। लेकिन वे ये नहीं जानते कि इससे तनाव तो कम नहीं होता बल्कि उत्तेजना और बढ़ जाती है।
इससे सोचने समझने की शक्ति भी खो बैठते है अोर समस्या का कोई सामाधान भी नही निकलता । तनाव से बचने का
सबसे अच्छा उपाय है कि हर काम, हर समस्या के समाधान
की खोज पूरे आत्मविश्वास के साथ करें। आत्मविश्वास की
कमी ही तनाव पैदा करती है।
इसीलए आज के युग के प्रबल शत्रु तनाव से सदा दूर रहे। उसे
अपने से दूर रखें । सफलता या असफलता की चिन्ता किए बिना पूरे आत्मविशवास के साथ काम पर जुट जाएँ ।


धन्यवाद। 

शुक्रवार, 22 सितंबर 2017

निर्णय ।

       निर्णय।

निर्णय लेना भी एक कला है ।व्यक्ति के निर्णयो मे ही
उसके विचारो की  झलक मिलती है। सकारात्मक चिंतन
वाले व्यक्ति मे नम्रता ,मित्रता ,विनम्रता , आशावादी ,साहस आदि भावनाएँ प्रबल होती है । जबकि नकारात्मक विचारधारा वाले वयक्ति मे ईर्ष्या,द्वेष ,लोभ,स्वार्थ आदि की
प्रमुखता रहती है । सकारात्मक चिंतन उचित निर्णय का आद्यार बनता है ।जबकि नकारात्मक चिंतन गलत निर्णय अथवा अनिर्णय की स्थिति उत्पन्न करता है।

     यदि अनिर्णय आैर गलत निर्णय मे से किसी एक को चुनना मजबुरी हो तो गलत निर्णय चुनना अधिक उचित होगा ,क्योकि कुछ ना करने से बेहतर है   कु छ भी करना ।  दुनिया में दो तरह के आदमी है एक तो वे जो हमेशा भाग्य को दोष देते रहते है ओर दूसरे वे जी अपने पुरुषार्थ से अपना भाग्य
स्वयं लिखते है । जो हमेशा सफल होते है और अपने गुणाे के बल पर निरतंर सफलता के मार्गपर  अग्रसर है।

धन्यवाद।।🙏🙏🙏🙏🙏

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गुरू