Education blog is very important for childrens as well as adults because it the most important part of our life .Without education we all are nothing .
बुधवार, 11 मार्च 2020
मंगलवार, 25 फ़रवरी 2020
सुकून और खुशी की चाहत हर किसी को होती है पर यह तभी मिल सकती है , जब अति महत्वाकांक्षा से बचने की कोशिश करते हुए जीवन को सरल किया जाए।
बचपन को देखकर हर कोई खुश होता है , हर कोई बच्चा बन जाना चाहता है अपने बचपन के दिनो मे लौट जाना चाहता है , शायद इसलिए बचपन में न कोई फिक्र होती है, न कोई गम ।
हम खुशी को प्राय: बाहर ही तलाशते है जबकि यह हमारे भीतर ही होती है अपने पर भरोसा रख कर निरंतर स्वयं को आगे बढ़ाने की कोशिश करे तो जीवन मे हर पल, हर दिन उत्साह बना रहेगा '
धन्य
शुक्रवार, 11 मई 2018
श्रेष्ठता।
श्रेष्ठता।
अक्सर जो चीजें आप प्लान करते हैं वे हुबहु नही होती। ऐसा सबके साथ होता है। कामयाबी सबके हिस्से में नहीं आती , अगर मिलती है तो उसका सम्मान करना चाहिए । यह भी सच है कि हर कार्य करने की योग्यता सब में नहीं होती , लेकिन कई बार कड़ी मेहनत करके टैलेंट को विकसित किया जा सकता है।
जिंदगी की चुनौतियों में कभी आप जीतेंगें तो कभी हार जाएंगे। आपको जीत का आनंद उठाना चाहिए। श्रेष्ठता कोई मंजिल नही बल्कि एक सफर है। रचनात्मकता को कई बार दूसरे क्षेत्रो की प्रेरणा की जरूरत होती है। असल में श्रेष्ठता और रचनात्मकता एक साथ आगे बढ़ती है। दोनों को साथ लेकर ही आप तरक्की कर सकते है।
अक्सर जो चीजें आप प्लान करते हैं वे हुबहु नही होती। ऐसा सबके साथ होता है। कामयाबी सबके हिस्से में नहीं आती , अगर मिलती है तो उसका सम्मान करना चाहिए । यह भी सच है कि हर कार्य करने की योग्यता सब में नहीं होती , लेकिन कई बार कड़ी मेहनत करके टैलेंट को विकसित किया जा सकता है।
जिंदगी की चुनौतियों में कभी आप जीतेंगें तो कभी हार जाएंगे। आपको जीत का आनंद उठाना चाहिए। श्रेष्ठता कोई मंजिल नही बल्कि एक सफर है। रचनात्मकता को कई बार दूसरे क्षेत्रो की प्रेरणा की जरूरत होती है। असल में श्रेष्ठता और रचनात्मकता एक साथ आगे बढ़ती है। दोनों को साथ लेकर ही आप तरक्की कर सकते है।
गुरुवार, 10 मई 2018
ज्ञान की थाह ।
ज्ञान की थाह ।
एक दिन स्वामी शंकराचार्य समुद्र किनारे बैठकर अपने शिष्यों
यो से वार्तालाप कर रहे थे। एक शिष्य ने चाटुकारिता भरे शब्दो मे कहा -"गुरुदेव आपने इतना अधिक ज्ञान प्राप्त कर लिया है, मेरे विचार से आप से अधिक ज्ञानी और कोई नहीं होगा।"
"मेरे पास ज्ञान का सागर है ,यह तुम्हे किसने बताया ? मुझे तो ज्ञान मे ओर वृद्धि करनी है ।" शंकराचार्य जी बोले।
फिर उन्होने अपने हाथ के डण्डे को पानी मे डुबो कर बाहर निकाला और उसका छोर शिष्य को दिखाते हुए बोले," इस दंड को जल मे डुबो ने पर इसने मात्र कुछ बूंदे ही जल की ग्रहण की । यही बात ज्ञान के विषय में है।
ज्ञानी कभी भी भरता नहीं है। ज्ञान ग्रहण करने पर बढ़ता जरूर है।"
यह सुनकर शिष्य ने लज्जा से सिर झुका लिया ।
धन्यवाद । ।
एक दिन स्वामी शंकराचार्य समुद्र किनारे बैठकर अपने शिष्यों
यो से वार्तालाप कर रहे थे। एक शिष्य ने चाटुकारिता भरे शब्दो मे कहा -"गुरुदेव आपने इतना अधिक ज्ञान प्राप्त कर लिया है, मेरे विचार से आप से अधिक ज्ञानी और कोई नहीं होगा।"
"मेरे पास ज्ञान का सागर है ,यह तुम्हे किसने बताया ? मुझे तो ज्ञान मे ओर वृद्धि करनी है ।" शंकराचार्य जी बोले।
फिर उन्होने अपने हाथ के डण्डे को पानी मे डुबो कर बाहर निकाला और उसका छोर शिष्य को दिखाते हुए बोले," इस दंड को जल मे डुबो ने पर इसने मात्र कुछ बूंदे ही जल की ग्रहण की । यही बात ज्ञान के विषय में है।
ज्ञानी कभी भी भरता नहीं है। ज्ञान ग्रहण करने पर बढ़ता जरूर है।"
यह सुनकर शिष्य ने लज्जा से सिर झुका लिया ।
धन्यवाद । ।
रविवार, 31 दिसंबर 2017
।। नववर्ष ।।
।। नववर्ष।।
अचानक ही पुराने कलैण्डर पर नजर गई तो देखा इस साल के दो दिन ही शेष रह गए है, नया साल आने वाला है। लोग नए साल के स्वागत के लिए उत्साहित है। पार्टिया ,नाच -गाने आदि का आयोजन जगह-जगह दिखाई देता है। हर कोई उम्मीद करता है कि आने वाला वर्ष उसके के लिए अपार खुशियाँ लेकर आए। हम पुरे साल उत्साहित अौर उर्जावान
बने रहे ।
क्या वास्तव मे हम पुरे साल उतने ही उर्जावान बने रहते है ?
जितना कि हम नववर्ष के स्वगात के लिए उत्साहित रहते है ।
हम तो नववर्ष से बहुत उम्मीदे रखते है, परन्तु कभी सोचा है,
कि नया साल भी तुमसे कुछ चाहता है।
वह चाहता है कि मै जब भी मनुष्य के जीवन मे नया बनकर
जाऊँ, मेरे हर पल ,हर क्षण ,हर प्रभात का मनुष्य इसी उल्लास के साथ स्वागत करता हुआ मिले।
केवल मनुष्य जीवन ही नहीं,इस संसार का प्रत्येक जीवन,
मेरे लिए नित्य नया उपहार लेकर आता रहे।
जीवन का हर प्रभात एक सच्चे मित्र की तरह होता है। हर प्रभात यही चाहता है कि जब मैं किसी के जीवन में जाऊँ तो
वो मेरे हर पल का, हर क्षण का इसी तरह स्वागत।करे, उनका
एक कदम आगे बढ़ा हुआ मिले। वो कभी भी हारा हुआ या
उदास ना मिले।
इसीलिए हर प्रभात, सुप्रभात।
धन्यवा
अचानक ही पुराने कलैण्डर पर नजर गई तो देखा इस साल के दो दिन ही शेष रह गए है, नया साल आने वाला है। लोग नए साल के स्वागत के लिए उत्साहित है। पार्टिया ,नाच -गाने आदि का आयोजन जगह-जगह दिखाई देता है। हर कोई उम्मीद करता है कि आने वाला वर्ष उसके के लिए अपार खुशियाँ लेकर आए। हम पुरे साल उत्साहित अौर उर्जावान
बने रहे ।
क्या वास्तव मे हम पुरे साल उतने ही उर्जावान बने रहते है ?
जितना कि हम नववर्ष के स्वगात के लिए उत्साहित रहते है ।
हम तो नववर्ष से बहुत उम्मीदे रखते है, परन्तु कभी सोचा है,
कि नया साल भी तुमसे कुछ चाहता है।
वह चाहता है कि मै जब भी मनुष्य के जीवन मे नया बनकर
जाऊँ, मेरे हर पल ,हर क्षण ,हर प्रभात का मनुष्य इसी उल्लास के साथ स्वागत करता हुआ मिले।
केवल मनुष्य जीवन ही नहीं,इस संसार का प्रत्येक जीवन,
मेरे लिए नित्य नया उपहार लेकर आता रहे।
जीवन का हर प्रभात एक सच्चे मित्र की तरह होता है। हर प्रभात यही चाहता है कि जब मैं किसी के जीवन में जाऊँ तो
वो मेरे हर पल का, हर क्षण का इसी तरह स्वागत।करे, उनका
एक कदम आगे बढ़ा हुआ मिले। वो कभी भी हारा हुआ या
उदास ना मिले।
इसीलिए हर प्रभात, सुप्रभात।
धन्यवा
शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017
।।शिक्षक।।
एक बार महात्मा गाँधी ट्रेन में सफर कर रहे थे। ट्रेन में सामने वाली सीट थोड़ी-सी फटी हुई थी। अचानक एक आदमी जो उनकी बगल में बैठा था उस फटी हुई सीट पर जाकर बैठ गया। उसने अपने बैग से सूई धागा निकाला और उस सीट को सीने लगा। गाँधीजी यह देखकर अचरज में पड़ गए। उन्होंने उत्सुकता उस सज्जन से पूछा ,"बन्धु।आप कौन हैं?" "मैं एक शिक्षक हूँ।" उस सज्जन ने जवाब दिया । तब गाँधीजी ने कहा - मुझे पक्का पता था कि आप एक शिक्षक ही होंगे। क्योंकि एक शिक्षक ही समाज को जोड़ने की बात सोच सकता है। कहा भी है:"शिक्षक एक मोमबत्ती के समान है जो स्वयं जलकर दूसरों को रोशनी प्रदान करता है"।
बुधवार, 27 दिसंबर 2017
।। मूल्यांकन जीवन का ।।
।। मूल्यांकन जीवन का।।
मानव जीवन तो एक अमूल्य हीरा है, करोड़ो रूपेए देकर भी ऐसा हीरा दोबारा मिलना मुश्किल है। यह अलग बात है कि हम लोग इसकी कीमत नहीं जानते।
ईश्वर ने हमे इस जीवन मूल्य को समझने के लिए बुद्धि दी है।
अपनी-अपनी बुद्धि अनुसार , हम अपने -अपने जीवन का मूल्यांकन दुसरो के साथ करते रहते है। इसी जीवन मूल्यांकन के चक्कर मे जीवन कब समाप्त हो जाता है पता ही नहीं चलता । भूतकाल का पछतावा अौर भविष्य की चिन्ता मे हम अपना वर्तमान भुल जाते है, अपने आप को भुल जाते है।
और जीवन के अनमोल पलो का सही मूल्यांकन नहीं कर पाते ।जीवन यूँ ही निकल जाता है।
गरीब दूर तक चलता है खाना खाने के लिए तो अमीर मीलों चलता है खाना पचाने के लिए।
किसी के पास खाने के लिए एक वक्त की रोटी नहीं है तो किसी के पास खाने के लिए वक्त ही नहीं है।
कोई लाचार है इसलिए बिमार है तो कोई बिमार है इसलिए लाचार है। कोई अपनो के लिए रोटी छोड़ देता है तो कोई
रोटी के लिए अपनो को छोड़ देता है।
सचमुच यह जीवन यूँ ही निकला जा रहा है।
धन्यवाद।
मानव जीवन तो एक अमूल्य हीरा है, करोड़ो रूपेए देकर भी ऐसा हीरा दोबारा मिलना मुश्किल है। यह अलग बात है कि हम लोग इसकी कीमत नहीं जानते।
ईश्वर ने हमे इस जीवन मूल्य को समझने के लिए बुद्धि दी है।
अपनी-अपनी बुद्धि अनुसार , हम अपने -अपने जीवन का मूल्यांकन दुसरो के साथ करते रहते है। इसी जीवन मूल्यांकन के चक्कर मे जीवन कब समाप्त हो जाता है पता ही नहीं चलता । भूतकाल का पछतावा अौर भविष्य की चिन्ता मे हम अपना वर्तमान भुल जाते है, अपने आप को भुल जाते है।
और जीवन के अनमोल पलो का सही मूल्यांकन नहीं कर पाते ।जीवन यूँ ही निकल जाता है।
गरीब दूर तक चलता है खाना खाने के लिए तो अमीर मीलों चलता है खाना पचाने के लिए।
किसी के पास खाने के लिए एक वक्त की रोटी नहीं है तो किसी के पास खाने के लिए वक्त ही नहीं है।
कोई लाचार है इसलिए बिमार है तो कोई बिमार है इसलिए लाचार है। कोई अपनो के लिए रोटी छोड़ देता है तो कोई
रोटी के लिए अपनो को छोड़ देता है।
सचमुच यह जीवन यूँ ही निकला जा रहा है।
धन्यवाद।
गुरुवार, 14 दिसंबर 2017
मानवता
कभी-कभी ऐसा लगता है , जैसे मानव जीवन से मानवता समाप्त होती जा रही है । हर व्यक्ति कोई कार्य सिर्फ अपने लाभ के लिए ही करता नजर आ रहा है। दया-धर्म आदि का मनाव जीवन में अपना एक अलग स्थान है।
हम अगर किसी के हित मे कुछ करते है तो उसका प्रतिफल हमें किसी न किसी रूप में जरूर मिलता है। हमारे आस-पास बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो छोटे-छोटे कार्य करके सामाज को लाभ देने का काम करते है। ये वो लोग होते है जिन्हें समाज के सुख में ही आना सुख नजर आता है जैसे लोगो की वजह से समाज में मानवता आज भी जीवित है। समाज को इनसे सीखना चाहिए और समाज की प्रसन्नता में अपनी खुशी खोजनी चाहिए । वैसे भी सनातन धर्म में सेवा करने से बड़ा पुण्य कोई नहीं है। सेवा न केवल हमें आत्मिक संतुष्टि देती है बल्कि जीवन को सुधारती है।
धन्यवाद🙏🙏🙏🙏🙏🙏
हम अगर किसी के हित मे कुछ करते है तो उसका प्रतिफल हमें किसी न किसी रूप में जरूर मिलता है। हमारे आस-पास बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो छोटे-छोटे कार्य करके सामाज को लाभ देने का काम करते है। ये वो लोग होते है जिन्हें समाज के सुख में ही आना सुख नजर आता है जैसे लोगो की वजह से समाज में मानवता आज भी जीवित है। समाज को इनसे सीखना चाहिए और समाज की प्रसन्नता में अपनी खुशी खोजनी चाहिए । वैसे भी सनातन धर्म में सेवा करने से बड़ा पुण्य कोई नहीं है। सेवा न केवल हमें आत्मिक संतुष्टि देती है बल्कि जीवन को सुधारती है।
धन्यवाद🙏🙏🙏🙏🙏🙏
सोमवार, 4 दिसंबर 2017
जीवन की मिठास ।।
जीवन की मिठास ।।
एक राहगीर ने नदी से पूछा " है माता ! क्या राज है कि तू इतनी छोटी है परन्तु फिर भी तेरा जल इतना मीठा है। जबकि
सागर इतना विशाल है, किन्तु उसका जल खारा है। "
नदी ने राहगीर से कहा कि "पथिक ! अच्छा होगा, कि तुम यह रहस्य सागर से ही पूछो। " पथिक ने सागर से भी यही सवाल किया ।
सागर ने कहा "हे मनुष्य ! नदी इस हाथ लेती है, उस हाथ देती है अपने पास कुछ नहीं रखती । परन्तु मैं सबसे लेता हूँ, देता किसी को नही । इसलिए मैं अपने में ही घुल-घुल कर खारा होता जा रहा हूं। यह मेरी संकीर्ण स्वार्थवृति है।"
रहागीर समझ गया कि जाे अपने सुख दुख साक्षा नही करता ,
जाे इस हाथ से लेकर उस हाथ देता नहीं, उसके जीवन की
मिठास समाप्त हो जाती है। अतः हमें भी अर्जन के साथ विसर्जन भी करना चाहिए।
धन्यवाद।
एक राहगीर ने नदी से पूछा " है माता ! क्या राज है कि तू इतनी छोटी है परन्तु फिर भी तेरा जल इतना मीठा है। जबकि
सागर इतना विशाल है, किन्तु उसका जल खारा है। "
नदी ने राहगीर से कहा कि "पथिक ! अच्छा होगा, कि तुम यह रहस्य सागर से ही पूछो। " पथिक ने सागर से भी यही सवाल किया ।
सागर ने कहा "हे मनुष्य ! नदी इस हाथ लेती है, उस हाथ देती है अपने पास कुछ नहीं रखती । परन्तु मैं सबसे लेता हूँ, देता किसी को नही । इसलिए मैं अपने में ही घुल-घुल कर खारा होता जा रहा हूं। यह मेरी संकीर्ण स्वार्थवृति है।"
रहागीर समझ गया कि जाे अपने सुख दुख साक्षा नही करता ,
जाे इस हाथ से लेकर उस हाथ देता नहीं, उसके जीवन की
मिठास समाप्त हो जाती है। अतः हमें भी अर्जन के साथ विसर्जन भी करना चाहिए।
धन्यवाद।
रविवार, 3 दिसंबर 2017
।ढाई आखर प्रेम का।।
ढाई आखर प्रेम का।।
प्रेम का अर्थ है "त्याग आैर सेवा। प्रेम एक ऐसा शब्द है, जो टूटे हुए दिलो को जोड़ता है,बिछड़ो को मिलाता है। विद्वेष को शांत करता है। शिकायतो को दूर करता है। यह सर्व विदित है
कि पारस को छूकर लोहा बहुमूल्य सोना बन जाता है। कुटिलता ,अनुदारता कृपणता व संकीर्णता को त्याग कर हम
उदारता अपनाएं तो हमारा मन प्रेम पयोधि बन जाएगा।
प्रेम जीवन के हिमालय का वह प्रणत है, जो गंगा-जमुना
बन बहता है और धरती के कण -कण को अंकुरित ,पल्लवित व पुष्पित करता है।
"खाता-बही न जोड़ता, बांचे नहीं किताब।
प्रेमी अपने प्रेम का ,रखता नहीं हिसाब।।
वह घर बनता स्वर्ग-सा ,रहता सुख का वास।
जिस घर में पलता रहे, प्रेम और विशवास।।"
कबीर ने भी कहा हैः ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय।।
धन्यवाद ।
प्रेम का अर्थ है "त्याग आैर सेवा। प्रेम एक ऐसा शब्द है, जो टूटे हुए दिलो को जोड़ता है,बिछड़ो को मिलाता है। विद्वेष को शांत करता है। शिकायतो को दूर करता है। यह सर्व विदित है
कि पारस को छूकर लोहा बहुमूल्य सोना बन जाता है। कुटिलता ,अनुदारता कृपणता व संकीर्णता को त्याग कर हम
उदारता अपनाएं तो हमारा मन प्रेम पयोधि बन जाएगा।
प्रेम जीवन के हिमालय का वह प्रणत है, जो गंगा-जमुना
बन बहता है और धरती के कण -कण को अंकुरित ,पल्लवित व पुष्पित करता है।
"खाता-बही न जोड़ता, बांचे नहीं किताब।
प्रेमी अपने प्रेम का ,रखता नहीं हिसाब।।
वह घर बनता स्वर्ग-सा ,रहता सुख का वास।
जिस घर में पलता रहे, प्रेम और विशवास।।"
कबीर ने भी कहा हैः ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय।।
धन्यवाद ।
शनिवार, 2 दिसंबर 2017
क्षमा वरदान है।
क्षमा वरदान।
भोजन में अौर सब कुछ हो,पर नमक न हो तोभोजन बेकार है।
मंदिर मे सब कुछ हो,पर मूर्ति न हो तो बेकार है। अस्पताल मे
सब कुछ हो, पर डॉ० न हो तो अस्पताल बेकार है। गाड़ी मे सब कुछ हो पर ब्रेक न हो तो गाड़ी बेकार है।
ठीक इसी तरह जीवन में और सब कुछ हो,पर आपस में
एक दूसरे को माफ करने की आदत न हो तो घर -परिवार सब
बेकार है। क्रोध जहर है, क्षमा अमृत है। इसिलिए कहते हैकि
"क्षण भर की चुप्पी ,दिन भर की मस्ती।"
क्रोध मनुष्य को जला देता है,क्षमा बड़ी चीज है। क्षमा प्रेम का परिधान है,विश्वास का विधान है,सृजन का सामान है, और नफरत का निदान है।
"दोष न मुख को दीजिए , दोषी है व्यवहार।
समता के व्यवहार से,मिलता है सत्कार।।
मुख की रक्षा कीजिए ,मौन बड़ा हथियार। एक चुप सौ को हरा,उत्तम यह व्यवहार।।
धन्यवाद।
भोजन में अौर सब कुछ हो,पर नमक न हो तोभोजन बेकार है।
मंदिर मे सब कुछ हो,पर मूर्ति न हो तो बेकार है। अस्पताल मे
सब कुछ हो, पर डॉ० न हो तो अस्पताल बेकार है। गाड़ी मे सब कुछ हो पर ब्रेक न हो तो गाड़ी बेकार है।
ठीक इसी तरह जीवन में और सब कुछ हो,पर आपस में
एक दूसरे को माफ करने की आदत न हो तो घर -परिवार सब
बेकार है। क्रोध जहर है, क्षमा अमृत है। इसिलिए कहते हैकि
"क्षण भर की चुप्पी ,दिन भर की मस्ती।"
क्रोध मनुष्य को जला देता है,क्षमा बड़ी चीज है। क्षमा प्रेम का परिधान है,विश्वास का विधान है,सृजन का सामान है, और नफरत का निदान है।
"दोष न मुख को दीजिए , दोषी है व्यवहार।
समता के व्यवहार से,मिलता है सत्कार।।
मुख की रक्षा कीजिए ,मौन बड़ा हथियार। एक चुप सौ को हरा,उत्तम यह व्यवहार।।
धन्यवाद।
शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017
रिश्ते
भारत एक ग्रामीण प्रधान देश है। गाँवो में परिवार बस्ते है। परिवारो में रिश्ते बनते है या यूँ कहे कि रिश्तो से परिवार बनते है और परिवार से समाज और गाँव। रिश्तो को पौधो की तरह धैर्य,प्रेम सर्मपण और आत्मीयता के जल से सींचना होगा , वरना वे मुरझा सकते हैं। किसी ने कहा है कि रिश्ते छः चीजों से चलते हैं-आना , जाना, खाना, खिलाना ,लेना और देना। परंतु मै यह मानती हूँ कि रिश्ते चीजो से नहीं , धैर्य, प्रेम , समर्पण और आत्मीयता से निभाते है , चलते नहीं ।
अफसोस कि आज हमारे पास साधन तो है परंतु साधना नहीं है, इसीलिए रिश्ते बेमौत मर रहे है।
धन्यवाद ।।🙏🙏
अफसोस कि आज हमारे पास साधन तो है परंतु साधना नहीं है, इसीलिए रिश्ते बेमौत मर रहे है।
धन्यवाद ।।🙏🙏
शनिवार, 25 नवंबर 2017
अधूरापन।।
अधूरापन ।।
हर मनुष्य अपने आप को अधूरा समझता है। सब कुछ हासिल कर लेने के बाद भी उसे अपने जीवन मे खालीपन महसूस होता रहता हैै ।
हर मनुष्य अधूरा है अौर उसे पूर्णता की यात्रा करनी ही पड़ती है। हम अपने जीवन से कभी संतुष्ट नहीं हो पाते , हमारी बहुत सारी इच्छाएँ होती है,हम बहुत कुछ पाना चाहते है ।
जीवन इतना बड़ा है कि हम उसे समझ ही नही पाते ,हर इंसान अपने जीवन के खालीपन को भरने के सब कुछ करता है फिर भी न जाने क्यो जीवन के अंतिम पड़ाव मे वह यह ही महसूस करता है कि अभी तो मुझे बहुत कुछ करना था
इस अधूरेपन को हम योग अोर परमार्थ के द्वारा ही भर सकते है ।
धन्यवाद।
हर मनुष्य अपने आप को अधूरा समझता है। सब कुछ हासिल कर लेने के बाद भी उसे अपने जीवन मे खालीपन महसूस होता रहता हैै ।
हर मनुष्य अधूरा है अौर उसे पूर्णता की यात्रा करनी ही पड़ती है। हम अपने जीवन से कभी संतुष्ट नहीं हो पाते , हमारी बहुत सारी इच्छाएँ होती है,हम बहुत कुछ पाना चाहते है ।
जीवन इतना बड़ा है कि हम उसे समझ ही नही पाते ,हर इंसान अपने जीवन के खालीपन को भरने के सब कुछ करता है फिर भी न जाने क्यो जीवन के अंतिम पड़ाव मे वह यह ही महसूस करता है कि अभी तो मुझे बहुत कुछ करना था
इस अधूरेपन को हम योग अोर परमार्थ के द्वारा ही भर सकते है ।
धन्यवाद।
रविवार, 12 नवंबर 2017
चापलूसी : मीठा जहर
एक पुराना शब्द है 'चापलूस ' आजकल उसका समानार्थी शब्द है ' चमचा ' । यह चमचा कसौटी को बदलने नहीं देता ।
चापलूसी मीठा जहर है। सुंदर शब्दों की प्यालियों से भरा हुआ यह हर किसी का मन मुग्ध कर लेता है। लेकिन अपना हित इसी में है कि इसे अमृत समझकर , इसे पीने की भूल नहीं करना चाहिए।
बीस चापलूसों की अपेक्षा एक निदंक भला है, जो कमियाँ दर्शाता रहकर कसौटी का कार्य करता है , जिनमें निंदा सहन करने की शक्ति नहीं है अथवा जिनके निंदक नहीं है, उसकी प्रगति में संदेह है । प्रशंसकों और चापलूसों द्वारा वस्तु स्थिति को सदैव बढ़ा- चढ़ाकर प्रस्तुत किये जाने से अहं ,दंभ और प्रदर्शन की प्रवृत्ति पनपती है। इससे व्यक्ति का पतन अवश्यम्भावी है।
गुण ग्रहिता ह्वदय से निकलती है और चापलूसी दाँतों से। गुण ग्रहिता निस्वार्थ होती है और चापलूसी स्वार्थमय।
धन्यवाद।।।
बुधवार, 8 नवंबर 2017
।। डर ।।
आज आवश्यकता है जीवन की सत्यता , सादगी, सेवा भावना , प्रेम ,भाईचारा , सामाजिक , समरसता ,एकता जागरूकता ,व निरंतरता की। हम अक्सर किसी काम को शुरु करने से पहले ही उसे कठिन मान बैठते हैं। इसलिए हम उस काम में पूरी तरह से कामयाब नहीं हो पाते।
मैंने अपने अनुभव से यह जाना है कि डर का न होना साहस नहीं है, बल्कि डर पर विजय पाना साहस है। बहादूर वह नहीं है तो भयभीत नहीं होता , कभी डरता रहीं , बल्कि बहादूर वह है जो इस डर को परास्त करता है। यह शारीरिक बहादुरी से तो कम,लेकिन मानसिक बहादुरी से ज्यादा संभव है।
क्या कभी किसी ने सोचा कि एक व्यक्ति जो चाहता था उसे क्यों नहीं मिला। जबकि उसके पास प्रतिभा , शक्ति , धीरज और प्रतिबद्धता थी? उसके पास यह सब कुछ था, लेकिन उसके भीतर एक डर था, जिससे वह हमेशा हारता रहा। इसलिए इस डर से बचे और इस पर काबू पाएं।
मैंने अपने अनुभव से यह जाना है कि डर का न होना साहस नहीं है, बल्कि डर पर विजय पाना साहस है। बहादूर वह नहीं है तो भयभीत नहीं होता , कभी डरता रहीं , बल्कि बहादूर वह है जो इस डर को परास्त करता है। यह शारीरिक बहादुरी से तो कम,लेकिन मानसिक बहादुरी से ज्यादा संभव है।
क्या कभी किसी ने सोचा कि एक व्यक्ति जो चाहता था उसे क्यों नहीं मिला। जबकि उसके पास प्रतिभा , शक्ति , धीरज और प्रतिबद्धता थी? उसके पास यह सब कुछ था, लेकिन उसके भीतर एक डर था, जिससे वह हमेशा हारता रहा। इसलिए इस डर से बचे और इस पर काबू पाएं।
मंगलवार, 7 नवंबर 2017
परिश्रम का कोई विकल्प नहीं।
- सफलता यदि चाहते तुम भी परिश्रम से जोड़ लो नाता । फश्रमयदि करे कोई , पत्थरों में फूल खिल जाता।।
एक धनवान पिता का पुत्र क्या मोची का काम करेगा ? क्या पढ़ा लिखा युवक ऐसा काम करेगा ? उस गलत मान्यताओ और धारणाओं ने आदमी को आलसी बना दिया है। आदमी बिना हाथ पैर हिलाये सिधा सुख चाहता है। यह सच है 'परिश्रम का कोई विकल्प नहीं '।जीवन निर्माण की पहली शर्त है-'कठोर परिश्रम'।समाज और राष्ट्र निर्माण की पहली शर्त है 'कठोर श्रम' । प्रतिभा परिश्रम से ही निखरती है। विजयलक्ष्मी श्रम की सहचरी और साहस की पत्नी है कहा भी है- हो हिम्मत पास तो मुट्टी में आसमान । परिश्रम वह सुनहरी चाबी है जो किस्मत के फाटक खोल देती है।
सोमवार, 23 अक्टूबर 2017
॥ समय बड़ा अनमोल ॥
एक दशांश सेकेण्ड की कीमत क्या है?
पूछो ओलम्पिक में स्वर्णपदक खो देने वाले खिलाड़ी से
एक सेकेण्ड की कीमत क्या है?
पूछो जानलेवा दुर्घटना से बचे भाग्यशाली व्यक्ति से
एक मिनट की कीमत क्या है?
पूछो गाड़ी छूट जाने वाले यात्री से
एक घंटे की कीमत क्या है?
पूछो पति की राह देखती भाव विवश पत्नी से
एक दिन की कीमत क्या है?
पूछो रोज पगार पाकर पेट भरने वाले मजदूर से
एक सप्ताह की कीमत क्या है?
पूछो पिटी हुई फिल्म के प्रोड्यूसर से
एक महीने की कीमत क्या है?
पूछो उस माँ से जिसने समय से पूर्व जन्म दिया हो शिशु को
एक साल की कीमत क्या है?
पूछो परीक्षा में अनुत्तीर्ण हुए विद्यार्थी से
आओ समय पर चलने का नियम बनाएँ।
पूछो ओलम्पिक में स्वर्णपदक खो देने वाले खिलाड़ी से
एक सेकेण्ड की कीमत क्या है?
पूछो जानलेवा दुर्घटना से बचे भाग्यशाली व्यक्ति से
एक मिनट की कीमत क्या है?
पूछो गाड़ी छूट जाने वाले यात्री से
एक घंटे की कीमत क्या है?
पूछो पति की राह देखती भाव विवश पत्नी से
एक दिन की कीमत क्या है?
पूछो रोज पगार पाकर पेट भरने वाले मजदूर से
एक सप्ताह की कीमत क्या है?
पूछो पिटी हुई फिल्म के प्रोड्यूसर से
एक महीने की कीमत क्या है?
पूछो उस माँ से जिसने समय से पूर्व जन्म दिया हो शिशु को
एक साल की कीमत क्या है?
पूछो परीक्षा में अनुत्तीर्ण हुए विद्यार्थी से
आओ समय पर चलने का नियम बनाएँ।
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क्षमा वरदान। भोजन में अौर सब कुछ हो,पर नमक न हो तोभोजन बेकार है। मंदिर मे सब कुछ हो,पर मूर्ति न हो तो बेकार है। अस्पताल मे सब ...
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अधूरापन ।। हर मनुष्य अपने आप को अधूरा समझता है। सब कुछ हासिल कर लेने के बाद भी उसे अपने जीवन मे खालीपन महसूस होता रहता हैै । हर...


